Jayendra Lok

Vairagee Banva Hu To (Hindi)

वैरागी बनवा हुं तो, चाली वीर वेशमां, 

वीरना ए मार्गमां रे, गुरुना ए राजमां….

 हो जी रे.. वैरागी बनवा हुं तो…(१)

 

गुरुकुळ वास मळ्यो, गुरुमाँनो साथ मळ्यो, 

वैराग्य ज्ञान मळ्यूं, सौर्यतानो ताज मळ्यो, 

मुहूर्त मळ्युं रे मुजने, रत्नोनी जोडथी रे, 

हो जी रे.. वैरागी बनवा हुं तो…(२)

 

आशिष माता-पिताना, सोनेरी सूरज लाव्या, 

नाण एवी बंधाणी, चौमुखे प्रभुजी पधार्या, 

गुरुवरना शुभ हस्ते, ओघो अपायो रे, 

हो जी रे.. वैरागी बनवा हुं तो…(३)

 

मुक्तीनो मारग छे, जाणे राजकुमारीनो साद, 

गुणरश्मि थकी पंचम पदने धरशुं, 

करशुं शंखनाद, रजोहरण हस्ते ग्रही, 

चालीशुं वीरानी साथ, प्रभुवीरना उत्तमपद

पामीने, तरी जशुं भवपार, तरी जशुं

भवपार, तरी जशुं भवपार, करी देशुं

सिंहनाद, मुज अंतरमा आह्लाद, तरी जशुं भवपार…(४)