Jayendra Lok

Shikharo Thee Sundar, Shashwat Giri Par (Hindi)

शिखरोथी सुंदर, शाश्र्वत गिरि पर,

ऋषभनी छाया, छायी रही छे,

 हवानी साथे, सिध्दोनी गाथा,

रायणनी शाखा, गाई रही है…(1)

 

श्रमणो ज्यां, सिध्दि वर्या छे,

मारा स्वामी, समोसर्या छे,

 सदीओथी कल-कल वहेती,

शेत्रुंजी नदी अहीं कहेती, ऋषभकथा…

ऋषभना राजमां, सिध्दगिरि राजमां,

झूमवुं मारे आ दादाना दरबारमां…(2)

 

मरुदेवानंद निहाळवा तमे,

संघ लईने आवो,

भवयात्राने अहीं टाळवा तमे,

 जात्रा करवा आवो…(3)

 

ज्यां पूर्व नव्वाणुं पधार्या,

मारा नाथजी, ए आदिने विनवुं,

 के मारो झालो हाथजी,

ऋषभना राजमां, सिध्दगिरि राजमां,

झूमवुं मारे आ दादाना दरबारमां…(4)