Jayendra Lok

Siddhipath Par Javano (Hindi)

सिद्धिपथ पर जवानो,

विरतीरथ छे सहारो,

 सिद्धिपथना पथिकने,

विरतीरथनो सहारो,

विरतीरथ पर हंमेशा,

सद्गुरुनो सहारो,

 विरतीरथ पर मळे छे,

सिद्धिपथनो किनारो,

 विरती महीं रति छे… (१)

 

नाना-नाना पगलां अहिंया,

संयम जीवन जेवा,

 प्रभु आज्ञाना पालन साथे,

गुरु चरणोनी सेवा,

काऊसग्गने क्रियाओ,

सत्त्वशाली बनावे,

 गुरुदेवनी वाचना,

आत्म ध्याने डुबावे,

 नवकार मंत्रनी साधनाथी,

सफळ आ जन्मारो,

 दिन-रात जपता वधे,

मैत्रीभाव अमारो,

विरती महीं रति छे… (२)

 

तप अने स्वाध्यायथी तन-मन,

निर्मळ-निर्मळ थाशे,

 आतम महीं आनंदनो दरियो,

उछळी-उछळी गाशे,

 संसारनुं आ सुखतो,

आकाशी आभासी,

 निज आतमनुं सुखतो,

अनहद ने अविनाशी,

 यशोविजय गुरुनी निश्राए,

अवसर आ मजानो,

 आतममां परमातम ध्याने,

प्रगटे गुणनो खजानो,

विरती महीं रति छे… (३)