Jayendra Lok

Aakhiya darishan ki hai pyasi hindi lyrics

अखियां दरिशन की हे प्यासी… पुरिषादानी पार्श्व तुमारी,

सुरनर जनता दासी,

आशा पूरण तुं अवनितल, सुरतरूने संकासी…१

निरागी शुं राग करंता, होवत जगमां हांसी,

एक पखो जे नेह चलावे, दीओ तेहने शाबाशी… २

अजर अमर अकलंक अनंतगुण, आप भये अविनाशी,

कारज सकल करी सुख पायो, अब क्युं होत उदासी… ३

तुं पुरुषोत्तम परम पुरुष है, तुं जगमें जितकासी,

जगथी दूर रह्यो पण मुज चित्त, अंतर क्युं कर जासी ?… ४

वामानंदन वंदन तुमया, करत है शुभ मति वासी,

ज्ञानविमल प्रभु चरण पसाये, समकित लील विलासी… ५