Jayendra Lok

Guru Taru Jeevan (Hindi)

गुरु तारूं जीवन, गुरुनी छबी छे, 

रामनी दोलत, तुजमां समी छे, 

सादगी नुं ऐश्वर्य, तुजमां झळहले छे, 

देखाव्युं दंभथी तुं, दूर विहरे छे…(१)

 

स्वाध्याय रमणता, ए ज तारूं जीवन, 

प्रभुना वचनोमां, रहे तारुं तन-मन,

 प्रशम तारी मुद्रा जोई,सौना दिल ठरे छे, 

सूरि रामनी जाणे, स्मृति खीले छे….(२)

 

गुरु तुज माता, गुरु तुज पिता, 

विषम आ काळमां, सतज्ञान दाता, 

देहना रागथी, मुक्त रहेनारा, 

सूरि जगच्चदराजने, नमन छे अमारा, 

गुरु तारूं जीवन…(३)

 

तारी ज अमीद्रष्टि, ए ज मारी छे सृष्ठि,

 तारी ज उपस्थिति, सदा दे छे शक्ति, 

गुरु शुं कहुं हुं तुजने,

चाहुं छु हुं अनहद तुजने,

गुरु मारूं आतम धन, प्रभु नुं तुं छे दर्पण,

 गुरु तारूं जीवन…(४)