Jayendra Lok

Jay Jay Varo,Jay Jay Varo (Hindi)

जय जय वरो, जय जय वरो…

 संयमपंथे हवे, जय जय वरो…(१)

 

शुभमंगल घडीओ आवी तारे द्वारे, 

दुनियाना बंधन तोडीने तुं चाल, 

तुजने मुक्तिनुं अंबर आज पुकारे, 

भवपिंजर तोडी उडीजा तुं, 

आज हवे, सत्त्वधरो, सत्त्ववरो, 

भले आवेने विघ्नो हजार…(२)

 

अमे करशुं विरती वधामणां, 

अमे देशुं शुभशुभकामनां.. 

जय वरो, जय जय वरो… 

मन मक्कम करी तुं चालजे, 

विघ्नोने तुं पडकारजे, 

जय वरो, जय जय वरो…(३)

 

तुं तने ओळखे, साचो सिंहबाळ छे, 

शाश्वता सत्योनो, तुं रखेवाळ छे, तारी

गुण-कीर्तिनी, दिव्यता न्यारो छे…(४)

 

जेना पर चाली मुक्तिमंझील पामे, 

एवा रस्ते छे तारी साधना, 

जन्मो-जन्मोनां पुण्यो तारा जाग्या, 

त्यारे मळी तुजने आवी गुरुमात हवे, 

जय जय वरो… भवजल तरो, 

संयमपंथे…..(५)