Jayendra Lok

Maru Jeevan Sugandhi Bane(Hindi)

मारू जीवन सुगंधी बने

मारू जीवन सुगंधी बने…..

एकज अरमान छे मने, मारू जीवन सुगंधी बने ।

फुलड़ा बनु के, धूप सळीथाऊ… (२)

आशा छे साम्रगी, पूजा निर्धावू… (२)

भले काया…. (२) आ राख थई क्षमे,

मारू जीवन सुगंधी बने…..(१) 

जगनी खराश बधी उरमा समावे… (२)

तो ए सागर मिठी वर्षा वरसावे… (२)

सदा भरतीने…. (२) ओट मा रमे,

मारू जीवन सुगंधी बने…..(२) 

वातावरण मा सुगंध ना समाती… (२)

जेम जेम सुखड़ ओरसिये घसाती…(२)

प्रभु काजे…. (२) घसावू गमे,

मारू जीवन सुगंधी बने…..(३) 

तड़का छाया केवा वर्षा ना वायरा… (२)

तो ए कुसुमो कदी ना करमाया…(२)

भाव खिलता…. (२) खिलता ए थमे,

मारू जीवन सुगंधी बने…..(४)