Jayendra Lok

Raha Joine Thakoo (Hindi)

राह जोईने थाकुं, मारगडे नजरो राखुं, 

पगलां पाडोने, पारस घर आवो आवोने…

 मननां झरूखडेथी, व्हाला वीतराग देखुं,

 प्रेमे पधारोने, पारस

घर आवो आवोने…(१)

 

दर्श करीने, मारी आंखो भरीने,

 मारा तनने करूं हुं पावन पावन… 

छूटी रे गई छे हवे जगतनी संगत, 

द्वारे तमारे आवन जावन… 

एकतान बनी सानभान भूली, 

भक्ति करूं मन भावन भावन… 

तार तार भने पार उतार, 

किरतार आवी मारा आंगण आंगण…

 भक्ति स्वीकारोने,

पारस घर आवो आवोने…(२)

 

मुक्यां उघाडां अमे मंदिरनां बारणां, 

भीतर पधारी करो पावन आ आंगणा, 

वर्षोनी कामना, अंतरनी भावना, 

लावी छे रंग, एना लउं छुं ओवारणां, 

घडीओ आ शुभनी आवी, 

व्हालेरा वावड लावी, हरखे वधावोने,

 पारस घर आवो आवोने…(३)

 

दीवडां मूक्यां छे अमे मंदिरना गोखमां,

 रंगोळी पूरी अमे शेरीना चोकमां, 

हाथे गुलाल लई, भक्तिमां लाल थई,

 हैये उमळको भर्यो छे जी थोकमां, 

सुरलोके सूरो गाजे,

धरती आ नाचे आजे,

अवसर सवायो रे,

पारस घर आवो आवोने…(४)