Jayendra Lok

Swapno Thaya Che Sakar (Hindi)

स्वपनो थया छे साकार, थाशे आतम निराकार, निराकार..

दुर-थाशे विषय विकार, थाशे आतम अविकार, अविकार..(१)

 

अणगार, अणगार… सजवो छे सयंम शणगार, 

गुरुवर आपो विरती सार, बनशे हवे जीवन आधार..(२)

 

आत्मोद्धार, आत्मोद्धार… करवो छे मारे भव-निस्तार,

 लिधो प्रभु ए आतम भार, करशे हवे आतम-उधार…(३)

 

सार नथी जडतो मुजने, मृगजळा संसारे रे,

 मोळो-मोळो लागे छे, मुजने आ कंसार रे, 

आपो मुजने आप सहारो, थाय मारो भवपारो, 

दूबती नैया दो किनारो, मुक्ति ना दातारो..

आत्मोद्धार….(४)

 

मंम मुंडावेह धोषथी, थाये जीवन सफळजी, 

रजोहरण लई, प्रदक्षीणा दई, बनीश वीर वारसजी, 

नुतन नामने, हितशिक्षा, पाळीश दिक्षा सरसजी.. 

प्रभु आणा, गुरु आज्ञा, एक ज लक्ष मारो, 

आत्मोद्धार…(५)

 

अहमने तमे त्यागजो ने, अर्हमने तमे भजजो रे, 

हुं पणानो नाश करजो, गुरु नाथ स्वीकारजो रे,

 जयंत तुजने मुक्ति आपशे, नित्य-जय करावशे रे,

निपुणताने आप वरजो, आत्मोद्धार करजो,

आत्मोद्धार…(६)