Jayendra Lok

Category: मंत्र

Narsingh Kavacham | नरसिंह कवच | Narsimha Kavacham

श्री नृसिंह कवच (Narsingh Kavacham) नृसिंह कवचम वक्ष्येऽ प्रह्लादनोदितं पुरा । सर्वरक्षाकरं पुण्यं सर्वोपद्रवनाशनं ॥ सर्वसंपत्करं चैव स्वर्गमोक्षप्रदायकम । ध्यात्वा नृसिंहं देवेशं हेमसिंहासनस्थितं॥ विवृतास्यं त्रिनयनं शरदिंदुसमप्रभं । लक्ष्म्यालिंगितवामांगम विभूतिभिरुपाश्रितं ॥ चतुर्भुजं कोमलांगम स्वर्णकुण्डलशोभितं । ऊरोजशोभितोरस्कं रत्नकेयूरमुद्रितं ॥ तप्तकांचनसंकाशं पीतनिर्मलवासनं । इंद्रादिसुरमौलिस्थस्फुरन्माणिक्यदीप्तिभि: ॥ विराजितपदद्वंद्वं शंखचक्रादिहेतिभि:। गरुत्मता च विनयात स्तूयमानं मुदान्वितं ॥

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श्रीहनुमत् पञ्चरत्नम् (Shri Hanumat Pancharatnam)

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित श्री हनुमत पञ्चरत्नं स्तोत्र में भगवान श्री हनुमान की विशेषता के बारे में बताया गया हैं। श्री हनुमत पञ्चरत्नं का पाठन करने वाला व्यक्ति भगवान श्री रामचंद्र का परम भक्त बन जाता हैं ।वीताखिल-विषयेच्छं जातानन्दाश्र पुलकमत्यच्छम् । सीतापति दूताद्यं वातात्मजमद्य भावये हृद्यम् ॥१॥ तरुणारुण मुख-कमलं

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Saptashloki Durga Stotra – सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम

सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र ॥ अथ सप्तश्लोकी दुर्गा ॥ शिव उवाच: देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी । कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ॥ देव्युवाच: शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम् । मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते ॥ विनियोग: ॐ अस्य श्री दुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः, श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः । ॐ ज्ञानिनामपि

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महालक्ष्मी मंत्र – ॐ महालक्ष्मयै नमो नमः (Malakshmi Mantra – Om Mahalaxmi Namoh Namah)

ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमःमहालक्ष्मयै नमः महालक्ष्मयै नमः महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमो नमः जाप ॐ महालक्ष्मयै नमो नमः विष्णू प्रियायी नमो नमः ॐ धनप्रदायी नमो नमः विश्व जननयी नमो नमः ॐ महालक्ष्मयै नमो नमः विष्णू प्रियायी नमो नमः ॐ

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माँ दुर्गा के 32 नाम (Shri Durga 32 Name)

देवी दुर्गा की द्वात्रिंश नामावली दुर्गा दुर्गातिशमनी दुर्गापद्धिनिवारिणी दुर्गमच्छेदनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी दुर्गमासुरसंहन्त्रि दुर्गमायुधधारिणी दुर्गमांगी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी ॥ इति श्रीदुर्गाद्वात्रिंशनामावलिः सम्पूर्णा ॥

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Vindhyeshwari Stotram Lyrics | श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम

Vindhyeshwari Stotram Lyricsश्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम निशुम्भ शुम्भ गर्जनी, प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी । बनेरणे प्रकाशिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ त्रिशूल मुण्ड धारिणी, धरा विघात हारिणी । गृहे-गृहे निवासिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ दरिद्र दुःख हारिणी, सदा विभूति कारिणी । वियोग शोक हारिणी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ लसत्सुलोल लोचनं, लतासनं वरप्रदं । कपाल-शूल धारिणी, भजामि

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Siddha Kunjika Stotram – Durga Saptashati | सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रम्

Durga Saptashati – Siddha Kunjika Stotram Lyricsसिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रम् ॥ दुर्गा सप्तशती: सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् ॥ शिव उवाच: शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम् । येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत ॥1॥ न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् । न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥2॥ कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् । अति

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संकटनाशन गणेश स्तोत्र – प्रणम्य शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम (Shri Sankat Nashan Ganesh Stotra)

नारद पुराण से उद्धरित श्री गणेश का लोकप्रिय संकटनाशन स्तोत्र, मुनि श्रेष्ठ श्री नारद जी द्वारा कहा गया है। इस स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति के जीवन के संकट मिट जाते हैं। अतः इस स्तोत्र को श्री संकटनाशन स्तोत्र अथवा सङ्कटनाशन गणपति स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है।॥

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Mantra Pushpanjali | पुष्पांजलि – ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त

Pushpanjali Mantra Lyrics in Hindi प्रथम: मंत्र ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तनि धर्माणि प्रथमान्यासन् । ते ह नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा: ॥ भावार्थ देवों ने यज्ञ के द्वारा यज्ञरुप प्रजापती का पूजन किया। यज्ञ और तत्सम उपासना के वे प्रारंभिक धर्मविधि थे। जहां पहले देवता निवास करते

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ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र (Rin Harta Shri Ganesh Stotra)

ऋण से छुटकारा पाने हेतु ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भक्त को कर्ज चुकाने मे आसानी होती है, साथ ही साथ धन अर्जित करने के अन्य कई साधन भी निकल आते हैं।॥ ध्यान ॥ ॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम् । ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि

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