Jayendra Lok

Category: कहानियां

गोस्वामी तुलसीदास की सूरदास जी से भेंट – सत्य कथा (Goswami Tulsidas Ki Surdas Ji Se Bhent)

श्री सूरदास जी से भगवान् का विनोद करना: संवत् १६१६ मे जब श्री तुलसीदास जी कामदगिरि पर्वत के पास निवास कर रहे थे, तब श्रीगोकुलनाथ जी की प्रेरणा से श्रीसूरदास जी उनके पास आये। उन्होने अपना सूरसागर ग्रंथ दिखाया और दो पद गाकार सुनाये, तुलसीदास जी ने पुस्तक उठाकर हृदय

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गोस्वामी तुलसीदास को श्री कृष्ण का राम रूप दर्शन – सत्य कथा (Goswami Tulsidas Dwara Shri Krishana Me Shri Ram Ke Darshan)

तुलसीदास जी को भगवान् श्री कृष्ण का राम रूप में दर्शन देना: भक्तमाल सुमेरु बनाने के पश्चात गोस्वामी जी नाभादास जी को साथ लेकर श्री मदनमोहन जी के दर्शन करने गए। गोस्वामी जी ने भगवान श्री मदन मोहन जी से प्रार्थना की: प्रभो ! आपकी यह छबि अवर्णनीय है, परंतु

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कृष्ण और शिकारी, संत की कथा – प्रभु भक्त अधीन (Prabhu Bhakt Adheen Krishn Shikari Aur Sant Katha)

एक बार श्रीमद्भागवत कथा सुनते समय गुरुदेव के मुख से एक कथा सुनी वो आपके लिए यहाँ पर लिख रहा हूँ। यह कथा सुनकर आपके ह्रदय में भगवान के लिए प्रेम जरूर जागेगा।एक बार की बात है। एक संत जंगल में कुटिया बना कर रहते थे और भगवान श्री कृष्ण

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ठाकुर जी सेवा में अहंकार नहीं विनम्रता रखें – प्रेरक कहानी (Thakur Ji Seva Mein Ahankar Nahin Vinamrata Rakhen)

कमल किशोर सोने एवं हीरे-जवाहरात बनाने एवं बेचने का काम करता था। उसकी दुकान से बने हुए गहने दूर-दूर तक मशहूर थे। लोग दूसरे शहर से भी कमल किशोर की दुकान से गहने लेने एवं बनवाने आते थे। चाहे हाथों के कंगन हो, चाहे गले का हार हो, चाहे कानों

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जब श्री कृष्ण बोले, मुझे कहीं छुपा लो – प्रेरक कहानी (Jab Shri Krishan Bole Mujhe Kahin Chupa Lo)

एक बार की बात है कि यशोदा मैया प्रभु श्री कृष्ण के उलाहनों से तंग आ गयीं और छड़ी लेकर श्री कृष्ण की ओर दौड़ी। जब प्रभु ने अपनी मैया को क्रोध में देखा तो वह अपना बचाव करने के लिबए भागने लगे।भागते-भागते श्री कृष्ण एक कुम्हार के पास पहुँचे।

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भक्त के अधीन भगवान – अनाथ बालक की कहानी (Bhakt Ke Adheen Bhagawan Anath Balak Ki Kahani)

एक गरीब बालक था जो कि अनाथ था। एक दिन वो बालक एक संत के आश्रम मे आया और बोला कि बाबा आप सबका ध्यान रखते है, मेरा इस दुनिया मे कोई नहीं हैं तो क्या मैं यहाँ आपके आश्रम मे रह सकता हूँ ?बालक की बात सुनकर संत बोले

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आखिर कर्म ही महान है – प्रेरक कहानी (Aakhir Karm Hi Mahan Hai)

एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहां गए। शाम को किसान ने उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।गांव के लोगों में कानाफूसी होने लगी कि

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बुरी आदतें बाद मे और बड़ी हो जाती हैं – प्रेरक कहानी (Buri Adaten Bad Main Aur Badi Ho Jatin Hain)

एक अमीर आदमी अपने बेटे की किसी बुरी आदत से बहुत परेशान था। वह जब भी बेटे से आदत छोड़ने को कहते तो एक ही जवाब मिलता, अभी मैं इतना छोटा हूँ.. धीरे-धीरे ये आदत छोड़ दूंगा! पर वह कभी भी आदत छोड़ने का प्रयास नहीं करता।उन्ही दिनों एक महात्मा

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इन्द्रियों के भोग से कैसे जीव का नाश हो सकता है (How can the soul be destroyed by the enjoyment of the indriya?)

कुरंग मातंग पतंग भृंग मीना हता पंचभिरेव पंच. नरः प्रमादी सुकथं न हन्यते ये सेवते पंचभिरेव पंचपरमात्मा द्वारा जीव को पांच ज्ञानेन्द्रियां प्रदान की गई हैं। श्रवण, त्वक,चक्षु, जिह्वा और घ्राणेन्द्रिय। इनके क्रमशः शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध विषय हैं। इन इन्द्रियों में से किसी एक का सेवन करने

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महिला के शुभ कदम – प्रेरक कहानी (Mahila Ke Shubh Kadam)

एक आदमी ने दुकानदार से पूछा: केले और सेवफल क्या भाव लगाऐ है? दुकानदार: केले 20 रु.दर्जन और सेव 100 रु. किलोउसी समय एक गरीब सी औरत दुकान में आयी और बोली मुझे एक किलो सेव और एक दर्जन केले चाहिए, क्या भाव है? भैया दुकानदार: केले 5 रु दर्जन

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