Jayendra Lok

Category: कहानियां

जीवन एक प्रतिध्वनि है – प्रेरक कहानी (Jeewan Ek Prati Dhwani Hai)

एक सब्जी वाला था, सब्जी की पूरी दुकान साइकिल पर लगाकर घूमता रहता था ।प्रभु, उसका तकिया कलाम था । कोई पूछता आलू कैसे दिये, 10 रुपये प्रभु। हरी धनियाँ है क्या? बिलकुल ताजा हैं प्रभु। वह सबको प्रभु कहता था। लोग भी उसको प्रभु कहकर पुकारने लगे। एक दिन

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मानवता भीतर के संस्कारों से पनपती है – प्रेरक कहानी (Manavata Bheetar Ke Sanskaron Se Panapati Hai)

श्री टी.एन. शेषन जब मुख्य चुनाव आयुक्त थे, तो परिवार के साथ छुट्टीयां बिताने के लिए मसूरी जा रहे थे। परिवार के साथ उत्तर प्रदेश से निकलते हुऐ रास्ते में उन्होंने देखा कि पेड़ों पर गौरैया के कई सुन्दर घोंसले बने हुए हैं।यह देखते ही उनकी पत्नी ने अपने घर

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मंजिल तक कैसे पहुँचा जाए – प्रेरक कहानी (Manjil Tak Kaise Pahuncha Jaye)

एक बार एक संत ने अपने दो भक्तों को बुलाया और कहा आप को यहाँ से पचास कोस जाना है।एक भक्त को एक बोरी खाने के समान से भर कर दी और कहा जो लायक मिले उसे देते जाना। और एक को खाली बोरी दी उससे कहा रास्ते मे जो

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दान करने से वस्तु घटती नहीं – प्रेरक कहानी (Daan Karne Se Bastu Ghatati Nahi)

एक दयालु नरेश | दान करने से वस्तु घटती नहीं एक राजा बड़े धर्मात्मा और दयालु थे, किंतु उनसे भूलसे कोई एक पाप हो गया था। जब उनकी मृत्यु हो गयी, तब उन्हें लेने यमराजके दूत आये। यमदूतों ने राजाको कोई कष्ट नहीं दिया। यमराजने उन्हें इतना ही कहा था

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कर्ण को ही सबसे बड़ा दानी क्यों कहते हैं? – प्रेरक कहानी (Karn Ko Hi Sabase Bada Dani Kyon Kahate Hain?)

एक बार की बात है कि श्री कृष्ण और अर्जुन कहीं जा रहे थे। रास्ते में अर्जुन ने श्री कृष्ण से पूछा कि प्रभु: एक जिज्ञासा है मेरे मन में, अगर आज्ञा हो तो पूछूँ?श्री कृष्ण ने कहा: अर्जुन, तुम मुझसे बिना किसी हिचक, कुछ भी पूछ सकते हो। तब

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जीवन में, सब ईश्वर की दया ही है – प्रेरक कहानी (Jeevan Mein, Sab Eshwar Ki Daya Hi Hai)

एक बार एक अमीर सेठ के यहाँ एक नौकर काम करता था, अमीर सेठ अपने नौकर से तो बहुत खुश था, लेकिन जब भी कोई कटु अनुभव होता तो वह भगवान को अनाप शनाप कहता और बहुत कोसता था।एक दिन वह अमीर सेठ ककड़ी खा रहा था, संयोग से वह

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जरूरतमंदों की मदद ही सबसे बड़ी सेवा – प्रेरक कहानी (Jaroorat Mandon Ki Madad Hi Sabse Badi Sewa)

एक वैद्य गुरु गोविंद सिंह के दर्शन हेतु आनन्दपुर गया। वहाँ गुरुजी से मिलने पर उन्होंने कहा कि जाओ और जरूरतमंदों को सेवा करो। वापस आकर वह रोगियों की सेवा में जुट गया। शीघ्र ही वह पूरे शहर में प्रसिद्ध हो गया। एक बार गुरु गोविंद सिंह स्वयं उसके घर

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ईश्वर बहुत दयालु है – प्रेरक कहानी (Eshwar Bahut Dayalu Hai)

एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था, उसमें तरह-तरह के फल होते थे और उस बगीचा की सारी देखरेख एक किसान अपने परिवार के साथ करता था। वह किसान हर दिन बगीचे के ताज़े फल लेकर राजा के राजमहल में जाता था ।एक दिन किसान ने पेड़ों पे

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जो भी होता है, अच्छे के लिए होता है – प्रेरक कहानी (Jo Bhi Hota Hai, Achchhe Ke Lie Hota Hai)

एक दिन के भगवान | भगवान की योजना: एक बार भगवान से उनका सेवक कहता है, भगवान: आप एक जगह खड़े-खड़े थक गये होंगे, एक दिन के लिए मैं आपकी जगह मूर्ति बनकर खड़ा हो जाता हूँ, आप मेरा रूप धारण कर घूम आओ।भगवान मान जाते हैं, लेकिन शर्त रखते

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कर्म-योग क्या है? – प्रेरक कहानी (Karm Yog Kiya Hai)

एक बार एक सात वर्ष का बालक रमन महर्षि के पास आया! उन्हे प्रणाम कर उसने अपनी जिज्ञासा उनके समक्ष रखी! वह बोला- क्या आप मुझे बता सकते है कि कर्म-योग क्या है? क्योंकि जब कभी भी मै यह प्रश्न अपने माता-पिता से पूछता हूँ, तो वे कहते है कि

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