
देव शास्त्र गुरु पूजा – 1 || Dev Shastra Guru Puja
जिनगीतिका शुचि ध्यान से त्रेसठ प्रकृति हन, वीतरागी हो गये, दृग ज्ञान सुख वीरज चतुष्टय, गुण अनंत निजी लिये। तीर्थेश बन उपदेश दे, अनगिन भविक निज सम किये, जिनदेव श्रुत गुरु बोध डालो, आज मेरे भी हिये ॥ ओं ह्रीं देवशास्त्रगुरु समूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम् अत्र तिष्ठ तिष्ठ




