Jayendra Lok

Category: पूजायें एवं पाठ

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जैन तीर्थंकर पूजाएँ || Jain Tirthankar Pooja

चतुर्थकालीन सांगानेर वाले बाबा ऋभदेव पूजन रचियता – लालचन्द जी जैन (राकेश) ऋषभदेव हैं धर्म – प्रवर्तक कर्म प्रवर्तक तीर्थंकर, कर्मनाश कर सिद्ध भये हैं, भक्त धन्य हैं दर्शनकर; साँगानेर वाले बाबा की प्रतिमा अतिशयकारी है, पाप नशाती संकट हरती, दर्शन की बलिहारी है, भक्ति भाव से पूजन करते, दीपक

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भूगर्भ प्रकटित अतिशयकारी श्री मुनिसुव्रतनाथ || Bhugarbha Praktit Atishaykari Shri Munisuvratnath Pooja

ज्ञानोदय तीर्थ (अजमेर) भारत छन्द -लय-वीर हिमाचल तैं प्राणत स्वर्ग तजो जिनराज, सु राजगृही प्रभु जन्म लियो है। श्री सुखमित्र सुमित्र पिता, पद्मा जननी घर धन्य कियो है॥ हे मुनिसुव्रतनाथ जिनेश्वर !, है हृदयांगन देश हमारो । भूमि सुनिर्गत हे महिमाधर,!, देर करो नहिं शीघ्र पधारो ॥ ओं ह्रीं भूगर्भ

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श्री आदिनाथ जिन पूजा 2022 || New Shri Aadinath Jin Pooja

मातृकाछन्द-लय झूलना हे ऋषभ देव! तेरी, शरण आ गये, मुझे दुख से उभरने, चरण भा गये। बड़े बाबा! तुम्हारी, शरण आ गये, मुझे दुख से उभरने, चरण भा गये ॥ नाभि मरुदेवी सुत, आदि जिन की शरण, नाशती है जरा मृत्यु, भव भव मरण । शोक सागर उभरने, तरणि पा

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श्री अजितनाथ जिन पूजा 2022 || New Shri Ajitnath Jin Pooja

ज्ञानोदय छन्द इन्द्रिय मन को जीत अजित जिन, द्वितीय तीर्थंकर प्यारे । विजय अनुत्तर से आ जन्में, क्षेमंकर जग से न्यारे ॥ पूजन हित आह्वानन करते, मेरे उर में आ जाओ। आप समान बने यह आतम, समकित बोध जगा जाओ ॥ ओं ह्रीं तीर्थंकर अजितनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट्

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श्री शंभवनाथ जिन पूजा 2022 || New Shri Sambhavnath Jin Pooja

सखी छन्द शंभव जिन शिव सुख पाये, संभव सम्यक् भव भाये। ग्रैवेयक से तुम आये, तीर्थंकर पितु हरषाये॥ मैं करूँ प्रभो आह्वानन, स्वीकारो मम उर आसन। नहिं तुम बिन कोई सहारा, कर दो उद्धार हमारा॥ ओं ह्रीं तीर्थंकरशंभवनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम् ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः

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श्री अभिनन्दन जिन पूजा 2022 || New Shri Abhinandan Jin Pooja

क्षमासखी छन्द अभिनन्दन जिनवर देवा, सुर नर मुनि करते सेवा । संवर नृप पिता सुहाये, गृह अवधपुरी में आये ॥ सिद्धार्था माँ कुलवन्ती, तुम जैसे सुत को जनती । प्रभु सोलह स्वप्न दिखाये, सत्रह में प्रवेश पाये ॥ हम पूजा करें तुम्हारी, गुण बगिया महके न्यारी । मम हृदयासन पे

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श्री सुमतिनाथ जिन पूजा 2022 || New Shri Sumatinath Jin Pooja

ज्ञानोदय छन्द सुमतिनाथ जिन सुमति प्रदाता, बोधि समाधि प्रदान करो। मेरे उर के सिंहासन पर, हे जिनवर पग आन धरो ॥ मातु मंगला नगर विनीता, संजयन्त स्वर तज आये। पिता मेघ प्रभु के प्रांगण में, सुरपति बाजे बजवाये ॥ पंचम तीर्थंकर प्रभु मेरी, विनती को अब स्वीकारो । बिन विलम्ब

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श्री पद्मप्रभ जिन पूजा 2022 || New Shri Padmaprabh Jin Pooja

ज्ञानोदय छन्द धरणी नृप गृह जन्म लिया है, मात सुसीमा हरषाती। ऊर्ध्व उच्च ग्रैवेयक से प्रभु, आते अवनी गुण गाती॥ कौशाम्बी नगरी सुख पाती, इन्द्र महोत्सव करते हैं। ऐसे वीतराग पद्मप्रभ, प्रभु को उर में धरते हैं॥ ओं ह्रीं तीर्थंकरपद्मप्रभजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम् ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः

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श्री सुपार्श्वनाथ जिन पूजा 2022 || New Shri Suparshwanath Jin Pooja

ज्ञानोदय छन्द सप्तम तीर्थंकर सुपार्श्व जिन, मध्यम ग्रीवक से आये । सुप्रतिष्ठ नृप पृथिवीसेना, नगर बनारस हरषाये ऐसे वीतराग जिनवर की पूजन करने हम आये । मेरे उर के सिंहासन पर, आप विराजो मन भाये ॥ ओं ह्रीं तीर्थंकरसुपार्श्वनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम् ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः

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श्री चन्द्रप्रभ जिन पूजा 2022 || New Shri Chandra Prabha Jin Pooja

ज्ञानोदय महासेन सुत! अष्टम जिनवर, वीतराग तीर्थंकर हो। माँ सुलक्षणा लाल चन्द्रप्रभ! करुणाकर क्षेमंकर हो॥ शत इन्द्रों से वंदित प्रभुवर, समवसरण में राजित हो। द्वादश गण नक्षत्र मध्य में, चन्द्र समान विराजित हो॥ चन्द्रप्रभा सम कान्तिमान् हो, जग में अतिशय सुन्दर हो। आधि व्याधि से रहित चन्द्रप्रभु, परम स्वास्थ्य के

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